चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारंभिक जीवन

आपको यह पता होगा कि मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य जी हैं। आज हम चंद्रगुप्त मौर्य जी के जीवन के बारे में जानेंगे।

चंद्रगुप्त मौर्य की बचपन की कहानी

चंद्रगुप्त मौर्य के विषय में जो जानकारियां प्राप्त हुई हैं, इससे यह पता चलता है कि चंद्रगुप्त मौर्य का जीवन अत्यंत ही कष्टमय था। वह तो भला हो इस चाणक्य का जिसने चंद्रगुप्त में वीर प्रतिभा को पहचाना और उसके लिए शिक्षा का प्रबंध किया। चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन में चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

चंद्रगुप्त का जन्म लगभग 345 ई. के मध्य हुआ था। उनका लालन-पालन उनकी विधवा माता ने किया। चंद्रगुप्त एक महान प्रतिभाशाली और कूटनीतिज्ञ व्यक्ति था उसे चाणक्य ने पहचाना और उनके लिए उचित शिक्षा का प्रबंध किया। चंद्रगुप्त की शिक्षा तक्षशिला में हुई और यहां उसे अस्त्र शस्त्रों के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इतिहासकार प्लूटार्क के अनुसार उसने यूनानी आक्रमणकारी सिकंदर से भी मुलाकात की थी। और चंद्रगुप्त को मगध राज्य पर आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया। चंद्रगुप्त मौर्य ने उसकी इस योजना को स्वीकार नहीं किया इस वजह से सिकंदर ने उसे बंदी बना लिया। और उसकी हत्या करने का आदेश दे दिया। लेकिन चंद्रगुप्त मौर्य बहुत ही चलाक था, वह सिकंदर के शिविर से भाग निकला और सिकंदर के सैन्य संगठन और युद्ध प्रणाली का ज्ञान चंद्रगुप्त को प्राप्त हुआ।

मौर्य कौन थे इस विषय में इतिहासकारों में मतभेद है और मौर्य के बारे में तीन जानकारियां प्राप्त हुई है-

1. मौर्य ईरानियों के वंशज थे।

2. मौर्य शूद्र थे,

3. मौर्य क्षत्रिय थे।

चंद्रगुप्त मौर्य की प्रमुख विजय

चंद्रगुप्त और चाणक्य का अद्भुत सहयोगी इस काल में हुआ था। चंद्रगुप्त की सैनिक व्यवस्था चाणक्य की नीति से सफल हुई, और भारत पर संपूर्ण सत्ता स्थापित हुई।

इसके संबंध में वी. ए. स्मिथ ने लिखा है कि- 18 वर्ष का लंबा समय लगा कर उसने दुनिया के सिपाहियों को भारत की सीमाओं से खदेड़ दिया विशेषकर पंजाब और सिंध की भूमि से उन्हें बाहर निकाल दिया सेल्यूकस की शक्ति को चंद्रगुप्त ने अलग कर दिया और स्वयं उत्तर भारत का निर्विवाद सम्राट बन गया।

चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य विस्तार- अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण के मशहूर तक इनका साम्राज्य फैला हुआ था। रुद्रदामन का जूनागढ़ के अभिलेख से यह सिद्ध होता है कि इस प्रदेश का सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य था और यह राज्य चंद्रगुप्त मौर्य के अधीन था। बंगाल पर भी चंद्रगुप्त मौर्य का शासन था। राजतरंगणी से यह पता चलता है कि कश्मीर पर भी मौर्यों का साम्राज्य था। जैन और तमिल स्रोतों से यह पता चलता है कि उत्तरी मैसूर का प्रदेश चंद्रगुप्त के अधीन था। सिंधु नदी के पश्चिम से लेकर हिंदुकुश के प्रदेश उसे यूनानीयों से प्राप्त हुई थी। नंद वंश के विनाश के बाद उस विशाल साम्राज्य का स्वामी चंद्रगुप्त ही था, इस प्रकार चंद्रगुप्त एक बहुत बड़े साम्राज्य का स्वामी बन गया था।

चंद्रगुप्त के कार्यों का मूल्यांकन

चंद्रगुप्त का जन्म एक साधारण परिवार में जन्म हुआ था, लेकिन अपनी प्रतिभा और बाहुबल पर एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। वह एक महान विजेता और साम्राज्य निर्माता था। वह एक कुशल सेनापति और निर्भीक योद्धा था। चंद्रगुप्त बचपन से ही विद्रोही प्रवृत्ति का था। वह किसी के समक्ष झुकना नहीं जानता था। वह एक स्वतंत्र प्रकृति का व्यक्ति था। नंद वंश का विनाश कर जनता को शोषण और उत्पीड़न से मुक्त कराया। इतिहासकार इसे भारतीय स्वतंत्रता का अग्रदूत मानते हैं। चंद्रगुप्त ने यूनानी सेनापति सेल्यूकस को संधि करने पर मजबूर कर दिया। इस प्रकार उसने भारतीयों की पराजय का प्रतिशोध लिया और यूनानी यों ने इससे भयभीत होकर आक्रमण करने का साहस नहीं किया।

चंद्रगुप्त मौर्य का व्यक्तिगत जीवन

चंद्रगुप्त मौर्य का व्यक्तिगत जीवन आदर्शमय था , चंद्रगुप्त अपना अधिकांश समय राजकार्य में व्यतीत करता था और वह एक न्याय प्रिय शासक भी था। उसने यह आदेश दिया था कि “कोई भी कभी भी न्याय के लिए उसके समक्ष उपस्थित हो सकता है।”

चंद्रगुप्त जनकल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहता था। साहित्य और कला का महान संरक्षक था। ‌ उस के शासनकाल में चाणक्य ने राजनीति शास्त्र पर एक उच्च कोटि के ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ का प्रतिपादन किया था। इसकी गणना भारत के महान शासकों में की जाती है। मुद्राराक्षस के अनुसार वह एक अवतरित देवता था जो सुख और समृद्धि देने के लिए स्वर्ग से उतरा था।

चंद्रगुप्त मौर्य के विषय में मेगास्थनीज लिखते हैं कि “चंद्रगुप्त अपने शत्रुओं से बहुत ही सावधान रहता था और कभी भी एक ही कक्ष में दो बार नहीं सोता था, स्री अंगरक्षकों का बड़ा समूह उसकी रक्षा के लिए हमेशा उपस्थित रहता था। चंद्रगुप्त जब कभी भी अपने महल से बाहर निकलता था तब अंग रक्षकों का दल दोनों ओर खड़ा रहता था‌। मंत्रियों से परामर्श करता और गुप्तचरों की रिपोर्ट सुनता और इससे आदेश प्रसारित करता था। शाम के समय वह अपनी सेना का निरीक्षण करता था। चंद्रगुप्त को शिकार का बहुत अधिक शौक था।”

राधाकुमुद मुखर्जी के अनुसार- “चंद्रगुप्त मौर्य पहले एक ऐसे भारतीय राजा थे, जिन्होंने भारत पर अपना शासन स्थापित किया। जिसका विस्तार ब्रिटिश भारत से भी बड़ा था। चंद्रगुप्त एक ऐसा पहला भारतीय राजा है, जिसने उत्तरी भारत को राजनीतिक रूप से एकबध्द करने के बाद विंध्याचल की सीमा से आगे अपने राज्य का विस्तार किया।”

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