विकेंद्रीकरण का अर्थ, परिभाषा, महत्व, लाभ व हानि

विकेंद्रीकरण से क्या तात्पर्य है

विकेंद्रीकरण से तात्पर्य निर्णय लेने के अधिकार को संगठन के निम्न स्तर पर पहुंचाना है विकेंद्रीकरण अधिकार अंतरण का विस्तृत रूप है, जब किसी उच्च अधिकारी के द्वारा अपने अधीन को अपेक्षाकृत अधिक भाग में अधिकारों का भारार्पण किया जाता है तो यह विकेंद्रीकरण कहलाता है।

विकेंद्रीकरण का अर्थ

जब निर्णय लेने के व्यवस्थित रूप से निम्न स्तर के प्रबंधनको या उनके नीचे कार्यरथ लोगों को कार्य सौंप दिया जाता है, इसे विकेंद्रीकरण कहते हैं।

विकेंद्रीकरण की परिभाषा

ऐलेन के अनुसार- “विकेंद्रीकरण उन अधिकारियों को छोड़कर जो केवल केंद्रीय स्तर पर उपयोग किए जा सकते हैं, शेष सभी अधिकारों को निम्न स्तर पर सौंपने का व्यवस्थित प्रयास है। विकेंद्रीकरण फैलाव या प्रयास से भिन्न है, जहां संस्था के संयंत्र यह कार्यालय भिन्न-भिन्न स्थानों में फैलाव की स्थिति में विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिलता है किंतु सुविधाओं के फैलाव में संस्था में केंद्रीयकारण हो सकता है।”

विकेंद्रीकरण के उद्देश्य

1. शीर्ष स्तर पर कार्य भार में कमी— निर्णय उचित प्रबंध शीर्ष स्तर पर लिए जाते हैं संगठन का विस्तार होने पर शीघ्र स्तर का कार्य और बढ़ जाता है अतः कार्य भार को काम करने के लिए विकेंद्रीकरण किया जाता है इससे शीर्ष अधिकारियों का कार्यभार कम होगा और वे अति महत्वपूर्ण कार्य के लिए अच्छा निर्णय ले सकते हैं।

2. प्रजातांत्रिक व्यवस्था मेला प्राप्त करने के लिए— विकेंद्रीकरण से अधिकारों का फैलाव छोटे छोटे स्तर तक हो जाता है इससे प्रजातांत्रिक व्यवस्था के समस्त लाभ सभी वर्ग को प्राप्त होते हैं।

3. कार्यों में शीघ्र निष्पादन के लिए— उच्च अधिकारियों के अधिकारियों को कम कर दिए जाते हैं तो वह अपने कार्यों को ठीक ढंग से वशीकरण उसका निपटारा कर ले सके इस के साथ प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकारों का होना आवश्यक है इससे कार्य शीघ्र पूर्ण किए जा सकते हैं।

4. सर्वागीण विकास— विकेंद्रीकरण से शीर्ष स्तर पर निम्न स्तर के समस्त अधिकारियों को अधिकार प्राप्त होने से उन्हें अपने विकास का पूर्ण अवसर प्राप्त होता है इसमें पूर्ण कार्य क्षमता के कार्य निष्पादित किए जा सकते हैं संगठन के सर्वागीण विकास के लिए भी विकेंद्रीकरण आवश्यक है।

5. बड़े संगठनों में प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था— बड़े-बड़े संगठनों में प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था बनाए रखने के लिए विकेंद्रीकरण आवश्यक है, क्योंकि बड़े-बड़े संगठनों में प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए विकेंद्रीकरण आवश्यक है।

विकेंद्रीकरण के महत्व

1. उच्च अधिकारियों की अत्यधिक कार्य भार से मुक्त— विकेंद्रीकरण के अंतर्गत दैनिक प्रबंध कार्यों को अध्ययन स्त्यों को सौंप दिया जाता था इसके फल सर्वोच्च प्रबंधकों को पास पर्याप्त समय बचता है जिसका प्रयोग में नियोजन समन्वय नीति निर्धारण नियंत्रण आदि में कर सकते हैं।

2. विभिन्न कारण से सुविधा— ईद के ऊपर से इनकार नहीं किया जाता कि एक व्यक्ति का नियंत्रण सर्वे श्रेष्ठ होता है लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है सीमा का अभि राय व्यवसाय के आकार से है अर्थात जब तक व्यवसाय का आकार छोटा है उच्च स्तर पर सभी अधिकारियों को केंद्रीय करके व्यवसाय को कुशलतापूर्वक चलाया जा सकता है लेकिन जब उसे उत्पादन की जाने वाली वस्तुओं की मात्रा अधिक हो जाती है तब केंद्रीय नियंत्रण से कम नहीं चल सकता क्योंकि अनेक व्यक्ति सभी वस्तुओं की समस्याओं की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सकता

3. प्रबंध के विकास— विकेंद्रीकरण का अभिप्राय है न्यूनतम स्तर के प्रबंधकों को भी अपने कार्य के संबंध में निर्णय लेने के अधिकार होना इस प्रकार निर्णय लेने के आवश्यक प्राप्त होने से सभी स्तरों के प्रबंधकों के ज्ञान एवं अनुभव में वृद्धि होती है और इस प्रकार कहा जाता है कि वह व्यवस्था प्रशिक्षण का क काम करती है।

4. कर्मचारियों के मनोबल में विधि— विकेंद्रीकरण के कारण प्रबंध में कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ती है इससे संस्था में उनकी पहचान बनती है जब किसी व्यक्ति की पहचान बने अथवा उसका महत्व बड़े तो उसके मनोबल में वृद्धि होना स्वाभाविक है मनोबल में वृद्धि होने से वे अपनी इकाई की सफलता में बड़े-बड़े त्याग करने से भी नहीं घबराते।

5. शीघ्र एवं श्रेष्ठ निर्णय— सभी प्रबंध के निर्णय का भोजपुरी व्यक्तियों पर ना होकर उनके व्यक्तियों में बढ़ जाने के कारण निर्णय से ग्रह लिए जाते हैं और श्रेष्ठ भी होते हैं सभी व्यक्तियों को अपनी इकाई अथवा विभाग की समस्याओं का पूरा ज्ञान होना है और इसी कारण वे अच्छे से अच्छे निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।

6. प्रभाव पूर्ण नियंत्रण— विकेंद्रीकरण अधिकारियों का कार्य श्रेष्ठ सीमित होने के कारण उनकी गलतियां की शीघ्र पकड़ा जा सकता है और उन्हें उतरा दायि ठहराया जा सकता है उत्तरदायित्व के डर से प्रबंध का अपनी इकाई सफलता के बारे में अधिक चिंतित रहे हैं और परिणाम स्वरूप वह सभी क्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।

विकेंद्रीकरण के लाभ

1. उच्च अधिकारियों का कार्य भार कम होना— विकेंद्रीकरण की सहायता से उच्च अधिकारियों के कार्यभार में बहुत कमी आ जाती है वह अपना पूरा ध्यान महत्वपूर्ण कार्यों में लगा सकते हैं उन्हें छोटे-छोटे कार्य में उलझन नहीं पड़ता है जिस कारण व्यवसायिक उपकरण उच्च अधिकारियों की योग्यता कुशलता तथा वे केंद्र का अधिकारी लाभ उठा सकते हैं।

2. विविधीकरण की सुविधा — विकेंद्रीकरण में विविधीकरण की पर्याप्त सुविधा होना चाहिए क्योंकि अलग-अलग क्रियाओं के लिए अलग-अलग अध्यक्षों की नियुक्ति की जा सकती है।

3. अनौपचारिक संबंधों का विकास — विकेंद्रीकरण के द्वारा अनौपचारिक संबंधों का विकास होता है

4. अभी प्रेरण — विकेंद्रीकरण के द्वारा कर्मचारियों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार होता है।

5. योग्य प्रबंधकों की प्राप्ति का स्रोत — विकेंद्रीकरण द्वारा स्वतंत्र निर्णय का भार प्राप्त होता है था योग्य प्रबंधक कि सही निर्णय ले पाते हैं इस प्रकार विकेंद्रीकरण के द्वारा योग्य प्रबंध को की प्राप्ति होती है

6. निर्णय लेने में सुविधा — लेकिन देश है निकटतम या अधिकारी कोई निर्णय देने का अधिकार दिया जाता है जिससे शीघ्र निर्णय ले सके।

7. मनोबल उच्च होना — विकेंद्रीकरण से निकटतम अधिकारी को निश्चित क्षेत्र से कार्य करने के लिए उत्तरदायी बनाया जाता है उन्हें अपने कार्य के लिए बार-बार उच्च अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं रहती है जिससे उनका मनोबल ऊंचा होता है।

विकेंद्रीकरण से हानि

1. समन्वय की समस्याएं— एक बड़ी संगठन में विभिन्न आदर्श इकाइयों के कार्यों में एकरूपता एवं समाजस्य स्थापित करना अत्यंत कठिन हो जाता है इन इकाइयों की पारंपरिक तीव्र प्रतिस्पर्धा से असहयोग उत्पन्न होता है और नियंत्रण रख पाना कठिन होता है कार्यों में दोह रेपन की भावना बढ़ जाती है।

2. प्रशासकीय व्यय में वृद्धि — विकेंद्रीकरण से विभिन्न विभागों में विभागों में संचालन व बढ़ जाता है इसका संस्था के लाभ पर को प्रभाव पड़ता है अतः विकेंद्रीकरण लघु संगठनों के लिए अधिक उपयुक्त नहीं है।

3. अधीनस्थों की अयोग्यता— विकेंद्रीकरण तभी संभव है जब निम्न स्तर के अधिकारी योग्य एवं निपुण हो अन्यथा संस्था में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

4. अनुपयुक्तता— जिन संस्थाओं में एक व्यक्ति का केंद्रीय निर्देश एवं नियंत्रण आवश्यक हो वह केंद्रीकरण उपयुक्त नहीं होता इस प्रकाश जिन कार्यों को छोटी छोटी इकाइयों में विभाजित करना संभव ना हो उनमें विकेंद्रीकरण लाभदायक नहीं होता।

5. विकेंद्रीकरण से आपात कालीन स्थिति में समस्या उत्पन्न हो सकती है श्रम संधो के साथ सौदेबाजी आदि में उच्च प्रबंधकों तक अधिकार सीमित रखना होता है।

केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण में अंतर|Kendrikaran aur Vikendrikaran mein Antar

केंद्रीकरण

1. इसका उद्गम छोटे संगठन में होता है।

2. यह सभी संस्थाओं में जरूरी होता है।

3. अधिकतर अधिकार उच्च स्तरीय प्रबंध के पास होते हैं और निम्न स्तर पर कम अधिकार होते हैं।

4. यह छोटे संगठन या संस्थाओं के लिए उपयुक्त होते हैं।

5. उच्च स्तर द्वारा अधिकार सौंपने के बाद अधीनस्थों पर पूर्ण नियंत्रण रहता है उन्हें कार्य करने की पूर्ण स्वतंत्रता नहीं होती है।

6. इसका क्षेत्र सीमित होता है।

7. कुछ अधिकारी को निम्न अधिकारियों से कार्य में सहायता लेने के लिए यह आवश्यक है।

8. उच्च स्तर के अधिकारियों के कार्यभार को कम करना होता है।

9. यह सभी संगठनों में प्रभावी होता है।

विकेंद्रीकरण

1. इसका उद्गम बड़े संगठनों में होता है।

2. यह सभी संस्थाओं में होना जरूरी नहीं है।

3. उच्च स्तर से निम्न स्तर तक अधिकार व्यवस्थात्मक रूप से विभाजित होते हैं।

4. यह बड़े संगठन या संस्थाओं के लिए उपयुक्त होता है।

5. उच्च स्तर द्वारा अधिकार सौंपने के बाद अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता है। उन्हें कार्य करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।

6. इसका क्षेत्र विस्तृत होता है।

7. उच्च अधिकारियों की इच्छा पर आधारित होता है कि वे लागू करना उचित समझते हैं या नहीं।

8. निम्न स्तरीय प्रबंध को कार्य की स्वतंत्रता देकर उनकी क्षमताओं में वृद्धि करना है।

9. यह केवल बड़े संगठनों में प्रभावी होता है।

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