सामाजिक गतिशीलता का अर्थ, परिभाषाएं, प्रकार

सामाजिक गतिशीलता का अर्थ | सामाजिक गतिशीलता से क्या तात्पर्य है लिखिए

         सामाजिक गतिशीलता एक सामाजिक तथ्य है। किसी व्यक्ति में बदलाव आना ही सामाजिक गतिशीलता कहलाती है। समाज शास्त्रियों ने सामाजिक गतिशीलता को सामाजिक परिवर्तन का एक अंग माना है। सामाजिक गतिशीलता सामान्य अर्थ में- एक व्यक्ति द्वारा एक स्थान या व्यवसाय को छोड़कर दूसरा स्थान या व्यवसाय को ग्रहण करने को ही सामाजिक गतिशीलता कह सकते हैं।

       साधारण शब्दों में - किसी धनवान फिल्म निर्माता को घाटा हो जाने के कारण वह गरीब हो जाता है, या किसी श्रमिक का फैक्ट्री का मालिक बन जाना आदि सामाजिक गतिशीलता कहलाती है।


सामाजिक गतिशीलता की परिभाषा

1. प्रोफ़ेसर एम. एस. दुबे ने सामाजिक गतिशीलता को परिभाषित करते हुए बतलाया है— ”सामाजिक गतिशीलता एक बहुत ही बड़ा शब्द है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति या संपूर्ण समूह की आर्थिक राजनीतिक या व्यवसायिक परिस्थिति में ऊपर या नीचे की ओर परिवर्तन होता है|"

2. प्रोफ़ेसर बोगार्ड्स के अनुसार— "सामाजिक पद में कोई भी परिवर्तन सामाजिक गतिशीलता कहलाती है।"

3. समाजशास्त्री हर्टन तथा हण्ट के अनुसार- "सामाजिक गतिशीलता का आशय उच्च या निम्न सामाजिक परिस्थितियों में गमन करना है।"

4. इसी तरह सुप्रसिद्ध समाजशास्त्र फेयर चाइल्ड ने अपनी 'डिक्शनरी ऑफ सोशियोलॉजी' में लिखा है। -"व्यक्तियों के एक समूह से दूसरे समूह में गमन को सामाजिक गतिशीलता कहा जा सकता है।"

सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएं लिखिए

1. गतिशीलता का संबंध परिस्थिति से होता है- सामाजिक गतिशीलता की सर्वप्रथम विशेषता यह है, कि इसका संबंध व्यक्ति के पद या परिस्थिति से होता है। जैसा कि हम जानते हैं जन्म लेने के पश्चात ही शिशु को समाज के सदस्य होने के नाते कुछ परिस्थिति प्राप्त हो जाती है। आयु बढ़ने के साथ-साथ व शिशु कुछ परिस्थिति अर्जित ही करता है। सामाजिक गतिशीलता का संबंधित समूह की परिस्थिति या पद से रहता है।

2. सामाजिक पद में परिवर्तन- सामाजिक गतिशीलता की एक प्रमुख विशेषताएं होती है कि व्यक्ति समूह के पूर्व की पद में निश्चित रूप से बदलाव आता है। यह बदलाव किसी भी रूप में हो सकता है लेकिन गतिशीलता में बदलाव आता है। उदाहरण के लिए जातीय संस्तरण में जातियों की परिस्थिति ऊंची व नीची रहती है। ब्राह्मण जाति के सदस्य क्षत्रिय जाति के सदस्यों से, क्षत्रिय जाति के सदस्यों वैश्य जाति के सदस्यों से व वैश्य जाति की सदस्य शूद्र जाति के सदस्यों से उच्च माने जाते थे। यदि कोई नीची जाति का व्यक्ति अपने मेहनत व परिश्रम से ऊंचा पद प्राप्त कर लेता है तो पद के साथ जुड़े पुत्र परिस्थिति का बन जाता है। यह सामाजिक गतिशीलता कही जाएगी।

3. परिवर्तन सामाजिक संरचना के अंतर्गत- गतिशीलता की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि समाज के सदस्यों की उपस्थिति या पद में जो भी परिवर्तन या बदलाव आता है संबंधित व्यक्ति की सामाजिक संरचना के अंतर्गत ही आता है। उदाहरण के लिए किसी पुलिस के सिपाही द्वारा कई प्रशंसनीय कार्य करने के कारण उसे सब इंस्पेक्टर बना दिया जाता है। ऐसी स्थिति में सिपाही की परिस्थिति व पद में परिवर्तन तो हुआ। या उसकी विभागीय संरचना में ही हुआ है।

4. गतिशीलता के निश्चित दिशा नहीं- गतिशीलता की एक विशेषता यह भी है कि इस कोई निश्चित दिशा नहीं होती। कोई श्रमिक अपनी बुद्धि एवं मेहनत से पूंजीपति बन जाता है तथा कोई पूंजीपति अपने कर्म से श्रमिक बैंक जीवन व्यतीत करता है इन दोनों प्रकार की परिस्थिति को सामाजिक गतिशीलता ही कहा जाएगा क्योंकि श्रमिक व पूंजीपति की परिस्थिति में परिवर्तन हुआ है। श्रमिक से पूंजीपति बनने वाले को उच्च परिस्थितियां पूंजीपति से श्रमिक बनने वाले को निम्न स्थिति प्राप्त हुई है। सामाजिक गतिशीलता की कोई निश्चित दिशा नहीं होती है वह तो ऊपर से नीचे व समांतर हो सकती है।


सामाजिक गतिशीलता के प्रकार

1. क्षैतिज या समरैखिक सामाजिक गतिशीलता- सामान्य अर्थ में क्षेत्रीय साम्राज्य की सामाजिक गतिशीलता हुआ है जब कोई व्यक्ति अपनी परिस्थिति के अनुसार ही कोई दूसरे समूह वर्ग में पद को प्राप्त करता है तो ऐसी गतिशीलता को क्षैतिज या समरैखिक गतिशीलता कहा जाता है। क्षैतिज या समरैखिक सामाजिक गतिशीलता को परिभाषित करते हुए गोल्ड एवं बाॅक ने  कहां है कि " बिना सामाजिक वर्ग पद में परिवर्तन किए परिस्थिति एवं भूमिका में, विशेष रूप से व्यवसाय क्षेत्र के परिवर्तन को क्षैतिज गतिशीलता कहते हैं।

              क्षैतिज सामाजिक गतिशीलता की विश विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि इसमें व्यक्ति या वस्तु की सामाजिक स्थिति या पद में किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होता बल्कि व्यक्ति या वस्तु का स्थानांतरण होता है और इसी महत्वपूर्ण तथ्य को क्षैतिज गतिशीलता माना गया है।


2. उदग्र या रैखिक सामाजिक गतिशीलता- सामान्य रूप में उदग्र या रैखिक सामाजिक गतिशीलता उस स्थिति को कहा जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति, समूह या वर्ग द्वारा एक सामाजिक परिस्थिति या स्तर से अन्य उच्च, निम्न सामाजिक परिस्थिति स्तर में स्थानांतरित हो जाता है। सामाजिक गतिशीलता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गोल्ड तथा कॉब ने लिखा है— "यदि किसी परिस्थिति या भूमिका में ऐसा परिवर्तन हो जिसमें सामाजिक वर्ग पद में भी परिवर्तन सम्मिलित हो उसे उदग्र गतिशीलता कहते हैं। जिसमें ऊपर या नीचे की और गतिशीलता शामिल है।" 

           प्रोफ़ेसर सोरोकिन ने लिखा है- उदग्र सामाजिक गतिशीलता हुआ है जिसमें की एक व्यक्ति या सामाजिक वस्तु का स्थानांतरण एक सामाजिक स्तर से दूसरे सामाजिक स्तर का हो जाता है उदग्र सामाजिक गतिशीलता कहलाता है।"

           उदग्र सामाजिक गतिशीलता में व्यक्ति समूह का एक स्तर से किसी भी प्रकार के दूसरे स्तर में गमन करना है। यह स्तर कुछ भी हो सकता है तथा निम्न भी हो सकता है। उदाहरण के लिए किसी धनवान फिल्म निर्माता को घाटा हो जाने के कारण दिवालिया हो जाना या किसी श्रमिक को फैक्ट्री मालिक बन जाना आदि, सामाजिक गतिशीलता है। 


सामाजिक गतिशीलता एवं सामाजिक परिवर्तन में अंतर

         सामाजिक गतिशीलता सामाजिक परिवर्तन की सामान्य एवं विस्तृत प्रक्रिया का ही अंग है। क्षैतिज या उदग्र सामाजिक गतिशीलता सामाजिक संरचना में परिवर्तन लाती है। तथा इसके द्वारा परिवर्तन की गति एवं मात्रा भी तीव्र होती है। सामाजिक परिवर्तन में समाज की संरचना, समूहों, संगठनों, संस्थाओं एवं संबंधों में परिवर्तन आता है। की सामाजिक गतिशीलता में व्यक्ति के पदों में परिवर्तन आता है।

          सामाजिक गतिशीलता एवं सामाजिक परिवर्तन में घनिष्ठ संबंध है। परिवर्तन एवं गतिशीलता को प्रोत्साहित करने वाले कारकों में भी समानता है। सामाजिक परिवर्तन का क्षेत्र व्यापक है। जिसमें सामाजिक व्यवहारों, प्रथम संबंधों, संगठनों, भूमिकाओं आदि में परिवर्तन को सम्मिलित किया जाता है। जबकि सामाजिक गतिशीलता में केवल व्यक्ति या समूह की स्थिति में होने वाले परिवर्तन को इन दोनों में इस प्रकार के अंतर हैं- 

1. व्यापकता के आधार पर- विवर्तन सामाजिक गतिशीलता की अपेक्षा अधिक व्यापक और विस्तृत होती है। सामाजिक गतिशीलता में व्यक्ति या समूह की स्थिति या पद में होने वाले परिवर्तन को ही सम्मिलित करते हैं। जबकि सामाजिक परिवर्तन में सामाजिक ढांचे एवं प्रकार यह में होने वाले परिवर्तनों को सम्मिलित करते हैं।

2. संबंध के आधार पर- सामाजिक परिवर्तन चौकी एक व्यापक अवधारणा है, अतः सामाजिक गतिशीलता उसका एक अंग है इसके संबंध में हम संपूर्णता अंग के रूप में प्रकट कर सकते हैं।

3. सामूहिकता के आधार पर- सामूहिक परिवर्तन का संबंध किसी समूह, समाज या समाज के बहुत बड़े भाग में परिवर्तन से हैं ना कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत संबंधों या व्यवहारों में परिवर्तन से। सामाजिक गतिशीलता में व्यक्ति पर अधिक जोर दिया जाता है उदाहरण के लिए, संपूर्ण जाति व्यवस्था में परिवर्तन सामाजिक परिवर्तन है, जबकि एक व्यक्ति द्वारा एक व्यवसाय छोड़कर दूसरा व्यवसाय ग्रहण करना सामाजिक गतिशीलता है।

4. कार्य के आधार पर- सामाजिक परिवर्तन सामाजिक गतिशीलता को संभव बनाता है। इस प्रकार सामाजिक परिवर्तन सामाजिक गतिशीलता का कारण है और सामाजिक गतिशीलता सामाजिक परिवर्तन का परिणाम है। उदाहरण के लिए स्वतंत्रता के पश्चात सरकार द्वारा निम्न जातियों की सामाजिक दशा को उन्नत करने के लिए अनेक प्रयास किए गए जिससे जाति व्यवस्था में परिवर्तन आए हैं और निम्न जातियों को उच्च पद वाद परिस्थितियां प्राप्त करने के अवसर मिले।

5. गति के आधार पर- सामाजिक परिवर्तन की अपेक्षा सामाजिक गतिशीलता की गति धीमी होती है, प्रमुख रूप से जाति व्यवस्था वाले समाजों में ऐसा अधिक होता है क्योंकि यहां गतिशीलता का विरोध किया जाता है। उदाहरण के लिए भी कोई व्यक्ति अपनी जाति छोड़ कर उस जाति की सदस्य ग्रहण करना चाहता है तो लोग इसका विरोध करते हैं।


सामाजिक गतिशीलता के परिणाम

जिस तरह से एक सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह सामाजिक गतिशीलता के अच्छे और बुरे दोनों परिणाम निकलते हैं। इसके सकारात्मक परिणाम:-


1. इससे योग्य व्यक्ति उचित स्थान प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं।

2. इससे लोगों को पर्यटन करने की प्रेरणा मिलती है।

3. इससे समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।

4. इससे समाज में गति के अवसर बढ़ जाते हैं।

5. यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर आधारित है।

6. इससे परंपरा क्रमांक एवं विकासशील समाजों में पिछड़े लोगों के लिए कल्याणकारी कार्य करके उन्हें आगे बढ़ाने एवं नवीन सामाजिक व्यवस्था में सम्मिलित करने की प्रेरणा मिलती है।


सामाजिक गतिशीलता के दुष्प्रभाव | सामाजिक गतिशीलता के दोष

1. जो लोग सामाजिक गतिशीलता के कारण समाज में ऊंचा उठना चाहते हैं, यदि उन्हें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं होती है तो वे समाज में विरोधी भावना अपना लेते हैं। विद्यमान व्यवस्था को तोड़ने का प्रयत्न करते हैं इसके फलस्वरूप प्रचलित समाज व्यवस्था के समर्थकों एवं विरोधियों में संघर्ष पैदा हो जाता है। जातीय दंगे है उसका एक प्रमुख उदाहरण है।

2. गतिशीलता की दौड़ में लगे लोग अनावश्यक रूप से परेशान और चिंतित रहने लगते हैं इससे मानसिक रोगों में वृद्धि होती है।

3.समाज में गतिशीलता से नए पद प्राप्त करने वाले एवं पुराने पदाधिकारियों के बीच तनाव एवं गुड बंदी पैदा होती है। सामाजिक गतिशीलता आधुनिक युग में प्रत्येक समाज की अनिवार्य आवश्यकता हो गई है और कोई भी समाज इसे से मुक्त नहीं हो सकता।

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