द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण और परिणाम सरल भाषा हिंदी में

द्वितीय विश्वयुद्ध का कारण

     तो चलिए आज हम जानते हैं कि  द्वितीय विश्वयुद्ध यानिकि (2nd world war) के मुख्य कारण कौन कौन से हो सकते है। Ok
द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण
द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण


तो देखिए सबसे पहले इस महा युद्ध के तात्कालिक कारण के बारे में जानना भी बहुत जरूरी है ना। तो आखिर कार इस महा युद्ध के होने क्या कारण है:-

  द्वितीय विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण 

हिटलर द्वारा पोलैंड पर आक्रमण द्वितीय महायुद्ध का तात्कालिक कारण था हिटलर बाल्टिक सागर तक पहुंचने के लिए मार्ग चाहता था उसने पोलैंड से मांग की कि डांसिंग बंदरगाह तथा वहां तक पहुंचने के लिए जर्मनी को मार्ग दे परंतु पोलैंड की सरकार ने फ्रांस से सहायता का आश्वासन पाकर हिटलर की मांग को ठुकरा दिया
हिटलर ने 1 सितंबर 1939 को जर्मन सेना ने पोलैंड मे घुसा दी। सितंबर को ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा की इस तरह पोलैंड पर हमले के साथ द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ।
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 प्रथम विश्वयुद्ध को समाप्त हुए भी मुश्किल से 20 वर्ष बीते होंगे कि सन 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ गया प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के बीच के 20 वर्षों का समय दुनिया भर में जबरदस्त परिवर्तनों का काल था इस काल में एक व्यापक संकट आया जिसने दुनिया के लगभग सारे भागों और खासकर पश्चिम में सबसे उन्नत पूंजीवादी देशों को प्रभावित किया। 

जर्मनी में हिटलर की महत्वाकांक्षा नाजियों को बढ़ावा यहूदियों का विरोध और साम्राज्यवादी नीति के कारण विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ मंचूरिया पर हमले से लेकर चेकोस्लोवाकिया को हथियार जाने तक जापान इटली और जर्मनी के सभी हमलों को पश्चिम देशों ने अपनी मौन सहमति दी थी परंतु फिर भी ना जी वादी और फासीवादी शक्तियों की महत्वाकांक्षा पूरी नहीं हुई वे विश्व को नए सिरे से बंटवारे की ओर बना रहे थे ।

द्वितीय विश्व युद्ध के मुख्य कारण

1. वर्साय की संधि:- 

वर्साय की संधि द्वितीय विश्वयुद्ध का एक प्रमुख कारण था।वर्साय की संधि में मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी ऑस्ट्रिया इटली और टर्की के मानो हाथ पैर तोड़ कर रख दिए अर्थात पंगु बना दिया। इसमें विशेषकर जर्मनी को बहुत अपमानित किया गया। अल्सास और लारेन का प्रांत वापस फ्रांस को दे दिया गया। जर्मनी को युद्ध अपराधी घोषित किया गया। उसकी सैनिक शक्ति को दुर्बल कर दिया गया।जर्मनी पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाला गया अतः जर्मनी के लोग इस अपमान का बदला लेना चाहते थे।

2. नाजी दल का उदय:-

1934 में नाजी दल का प्रभाव बढ़ गया और हिटलर जर्मनी का तानाशाह बन गया वह जर्मन कॉम को विश्व की महान शक्ति बनाना चाहता था। वर्साय संधियों की धज्जियां उड़ा दी। युद्ध नीति के सहारे उसने ऑस्ट्रिया सुदेतलैंड और चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया यही युद्ध नीति महायुद्ध का कारण बनी।

3. फासीवाद का उदय:-

 वर्साय की संधि से घोर आ संतुष्टि थी। परिणाम स्वरूप फासीवाद का जन्म हुआ। मुसोलिनी ने हिटलर की भांति इटली में सैनिक सरकार की स्थापना की इटली ने एबीसी नियर तथा अल्बानिया पर अधिकार कर लिया उसकी युद्ध नीति ने द्वितीय विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।

4. संघ की असफलता:- 

प्रथम महायुद्ध के पश्चात युद्ध को रोकने तथा विश्व में शांति बनाए रखने के लिए राष्ट्र संघ की स्थापना की गई,या संस्था असफल रही जब इटली ने अभी सीनियर जर्मनी ने ऑस्ट्रिया तथा चेकोस्लोवाकिया पर और जापान ने मंचूरिया पर अधिकार कर लिया तो राष्ट्र संघ उनके बढ़ते कदमों को रोकने की कोई कोशिश ना कर सका।

5. उग्र राष्ट्रवाद की भावना:- 

जर्मनी में हिटलर फ्रांस से बदला लेने की योजना बनाने लगा। फ्रांस ने जर्मनी की औद्योगिक बस्ती रूहर पर अधिकार कर लिया था हिटलर ने नाजियों में उग्र राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूट कर भर दी कि हमें और हमारे जर्मन  राष्ट्र को फ्रांस से बदला लेना है जापान भी विस्तारवादी नीति अपनाए हुए था।

6. तुष्टीकरण की नीति:-

तुष्टीकरण का तात्पर्य है किसी आक्रमक शक्ति को मनाने के लिए किसी कमजोर देश की बलि दे देना। सन 1917 की रूसी क्रांति के बाद राष्ट्रों के साम्यवाद की ओर झुकाव से पश्चिमी शक्तियां साम्यवाद को अपना शत्रु मानने लगी। जर्मनी इटली जापान आदि देश साम्यवाद के कट्टर विरोधी थे। हिटलर नहीं इटली से मित्रता कर साम्यवाद के विरुद्ध मोर्चा बना लिया तो फ्रांस और इंग्लैंड ने उसके प्रति उदार नीति अपनाई। इसी नीति को तुष्टिकरण की नीति कहा जाता है।


7. सैनिक गुटों का उदय:- 

प्रथम महायुद्ध की भांति द्वितीय महायुद्ध से पहले भी युद्ध हिंदू विरोधी सैनिक गुटों में बट गया था हिटलर ने अपनी स्थिति सुदृढ़ करने के लिए गुड बंदी का सहारा लिया और इटली के तानाशाह मुसोलिनी को अपनी ओर मिला लिया। 1936 ई. में इनके बीच एक संदेश भेजो रोम बर्लिन धोरी के नाम से प्रसिद्ध है। दूसरी और रूस और जापान की बात भी आपस में खटपट थी जर्मनी रूस का शत्रु था अतः 25 नवंबर 1936 को जर्मनी और जापान में रूस के विरुद्ध एक समझौता हुआ 1937 ईस्वी में इटली भी इसमें शामिल हो गया रोम बर्लिन टोकियो धुरी पूर्ण हुई। एक घूंट में धुरी राष्ट्र थे और दूसरे में इंग्लैंड ,रूस फ्रांस थे।

8. आर्थिक मंदी:-

 संपूर्ण विश्व में 1929 में घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया इससे एक नई स्थिति उत्पन्न हो गई सभी देशों में बेकारी बढ़ गई और साधारण जनता की स्थिति सोचनीय हो गई सन 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण करके उसके कई नगरों पर अधिकार कर लिया इससे विश्व में युद्ध का वातावरण निर्मित हो गया।

9. नी:शक्ति करण की समस्या:- 

वर्साय की संधि के अनुसार सभी राष्ट्र निशस्त्रीकरण की नीति का पालन करेंगे परंतु विजय राष्ट्रों ने जर्मनी से तो निशस्त्रीकरण की शर्तों का पालन किया और स्वयं मुक्त रहें इससे निशस्त्रीकरण की स्थान पर सस्त्री करण की भावना को बल मिला जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने कागज के चिथड़े कर वर्साय की संधि को ठुकरा दिया।

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  • द्वितीय विश्वयुद्ध से संबंधित GK के महत्वूर्ण Questions and Answers. 



1. (when was the second world war) द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रारंभ कब हुआ था ?
उत्तर=1 सितंबर 1939 ईस्वी।

2. ब्रिटेन एवं फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कब की?
उत्तर=3 सितंबर 1939 ईस्वी।

3. जर्मन सेना ने पेरिस पर अधिकार कब किया था?
उत्तर=14 जून 1940 ईस्वी।

4. जर्मनी ने सोवियत संघ पर आक्रमण कब किया था?
उत्तर=22 जून 1941 ईस्वी।

5. मुसोलिनी को कब फांसी दी गई?
उत्तर=अप्रैल 1945 ईस्वी।

6. हिटलर ने  कब आत्महत्या की?
उत्तर=2 मई 1945 ईस्वी।

7. अमेरिका ने हिरोशिमा (जापान) पर कब बम गिराया?
उत्तर=6 अगस्त 1945 ईस्वी।

8. अमेरिका ने नागासाकी (जापान) पर कब बम गिराया? 
उत्तर=9 अगस्त 1945 ईस्वी।

9.द्वितीय विश्वयुद्ध का अन्त कब हुआ था?
उत्तर=2 सितंबर 1945

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