(balmukund gupt ka jeevan parichay)
बालमुकुंद गुप्त जी का जन्म :- सन् 1865 ग्राम गुड़ियानी, जिला रोहतक (हरियाणा) में हुआ था।प्रमुख संपादन :- अखबार-ए-चुनार, हिंदुस्तान, हिंदी बंगवासी, भारतमित्र आदि।
प्रमुख रचनाएं:- शिवशंभू के चिट्ठे, चिट्ठे और खत, खेल तमाशा।
(balmukund gupt death)
मृत्यु:- सन् 1907.गुप्त जी की आरंभिक शिक्षा उर्दू में हुई बाद में उन्होंने हिंदी सीखी विविध शिक्षा मिडिल तक प्राप्त की मगर स्वाध्याय से काफी ज्ञान अर्जित किया वे खड़ी बोली और आधुनिक हिंदी साहित्य को स्थापित करने वाले लेखकों में से एक थे उन्होंने भारतेंदु युग दिवेदी युग के बीच की कड़ी के रूप में देखा जाता है
(balmukund gupt kis yug ke lekhak the)
बालमुकुंद गुप्त राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार थे। उस दौर के अन्य पत्रकारों की तरह वे साहित्य सृजन में भी सक्रिय रहे। पत्रकारिता उनके लिए स्वाधीनता संग्राम का हथियार थी। यही कारण है कि उनके लेखन में निर्भीकता पूरी तरह मौजूद है।साथ ही उनमें व्यंग विनोद का भी पुट दिखाई पड़ता है। उन्होंने बंगला और संस्कृति कुछ रचनाओं के अनुवाद भी किए वह शब्दों की आधारभूत पारखी थे। अनस्थिर का शब्द की शुद्धता को लेकर उन्होंने महावीर प्रसाद द्विवेदी से लंबी बहस की।
इस तरह के अन्य अनेक शब्दों पर उन्होंने वह चलाई। विदाई संभाषण उनकी सर्वाधिक चर्चित ब्यंग कृति शिवशंभू के चिट्ठी का एक अंश है।
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