पूर्ण प्रतियोगिता का आशय
परिभाषाएँ:
पूर्ण प्रतियोगिता की विशेषताएं
1. क्रेता एवं विक्रेता की अधिक संख्या हो जाना— पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत बाजार में क्रेता एवं विक्रेताओं का संख्या अधिक हो जाना प्रत्येक क्रेता की इच्छा कम खरीदना है और प्रत्येक विक्रेता इतना कम बेचता है कि ना कि कोई क्रेता और ना ही कोई विक्रेता बाजार में प्रचलित कीमत को प्रभावित करने की स्थिति में होता है।
2. बाजार की पूर्ण जानकारी— पूर्ण प्रतियोगिता में विक्रेता को बाजार की पूर्ण जानकारी होती है प्रत्येक वस्तु के संबंध में सभी बातों को सभी क्रेता पहले से ही जानने अथवा फार्म को प्रचार एवं विज्ञापन पर बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
3. कृत्रिम प्रतिबंधों का अभाव होना— प्रतियोगिता के एक ही विशेषता होती है कि बाजार में वस्तु तथा उत्पादन के साधन की मांग पूर्ति तथा कीमत के ऊपर निर्भर रहती है किसी भी प्रकार की कृत्रिम प्रबंधन नहीं होती है।
4. एक फार्म का स्वतंत्र प्रवेश तथा बहिर्गमन— पूर्ण प्रतियोगिता में उद्योग के अंतर्गत फर्म का आगमन एवं बहिर्गमन स्वतंत्रता रूप से किया जाता है दूसरे शब्दों में हम देखेंगे कि कोई भी फर्म जब चाहे उद्योग से अलग हो जा सकता है तब तक भी कोई फार्म उद्योग मैं आना चाहे आ सकता है।
5. उत्पादन साधनों की पूर्ण गतिशीलता होना— पूर्ण प्रतियोगिता का स्वतंत्रता पूर्वक कार्यशील बनाए रखने के लिए उत्पादन के साधनों की पूर्ण गतिविधि की आवश्यकता होती है उत्पादन के साधन जिस उद्योग का उपयोग लाभ के लिए करते हैं उसमें पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है।
6. वस्तु का समरूप अधिक होना— पूर्ण रूप से प्रतियोगिता बाजार की विशेषता यह होती है कि विभिन्न विक्रेताओं द्वारा बेची जाने वाली वस्तु क्रेताओं की दृष्टि से संपूर्ण होनी चाहिए जिससे कि बेची जाने वाली वस्तु क्रेताओं की दृष्टि से एक दूसरे के पूर्ण स्थान पर होना अति आवश्यक है जहां पर वस्तु की कीमत घट जाती है तो वहां वस्तु की मांग कीमत बढ़ जाती है
7. परिवहन लागतें नहीं होनी चाहिए— पूर्णस्पर्धा बाजार का विश्लेषण इस अधिकार से किया जाता है कि उसमें परिवहन संबंधित लागत नहीं होती है यह बाजार इस मान्यता पर आधारित होती है कि प्रश्न ही प्रश्न उठाई जा सके पूर्ण प्रतियोगिता को एक कोरी या सादा कल्पना भी कहा जाता है इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं होता है।
So easy languages
ReplyDelete