जल प्रदूषण क्या है?
जल प्रदूषण- जब जल में ऐसे पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं जो साधारण जल में नहीं पाए जाते हैं एवं जल को हानिकारक और दूषित बना देते हैं तो उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
जल प्रदूषण के कारणों का वर्णन कीजिए
- वाहित मल
- घरेलू अपमार्जक
- कीटनाशक पदार्थ
- औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थ
1. वाहित मल- मकानों से आने वाले मल-मूत्र, कूड़ा करकट नदियों समुद्रों आदि में मिल जाते हैं, इससे जल दूषित होता है।
2. घरेलू अपमार्जक- घर की सफाई, नहाने धोने से निकलने वाले अपमार्जक पदार्थ भी जल को दूषित कर देते हैं।
3. कीटनाशक पदार्थ- आजकल कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बढ़ता जा रहा है जो वर्षा के पानी से मिलकर जल प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।
4. औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थ- कारखानों से अलग-अलग रसायनिक पदार्थ पानी में मिलकर जल प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।
जल प्रदूषण रोकने के उपाय
1. बड़े बड़े कारखानों को नदियों और आबादी वाले स्थानों से दूर होना चाहिए।
2. जल में आणविक विस्फोट पर रोक लगाना चाहिए।
3. नालियों और नालों के पानी को पाइपलाइन द्वारा जोड़ा जाना चाहिए।
4. पेट्रोलियम पदार्थ पानी में ना बहाया जाए।
5. जल को आधुनिक तरीके से साफ करने की तकनीक विकसित की जानी चाहिए।
जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव | जल प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव
1. अपशिष्ट पदार्थों वाहित मल और कूड़ा करकट से जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है इससे जलीय जंतुओं और पौधों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
2. जल प्रदूषण से टाइफाइड और डायरिया होता है।
3. महामारी रोग पीलिया और मलेरिया फैलता है।
4. पानी में बदबू आती है और पानी पीने योग्य नहीं होता है।
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